बॉलीवुड में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और टैलेंट से, छोटे-छोटे किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में अपनी छाप छोड़ी। विजय राज उन्हीं में से एक हैं। अपनी अनोखी कॉमिक टाइमिंग और अलग अंदाज़ के लिए मशहूर, विजय राज ने “रन” फिल्म के कव्वा बिरयानी सीन से रातोंरात पहचान बनाई। लेकिन किस्मत का खेल देखिए, एक अभिनेता जो कॉमेडी का बादशाह बन सकता था, वो अचानक ऐसे विवादों में फंस गया जिसने उसके करियर को झटका दे दिया।
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शुरुआती सफर: छोटे किरदार से बड़ा नाम
विजय राज का सफर आसान नहीं था। दिल्ली के थिएटर से निकलकर उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। शुरुआत में उन्हें गार्ड, चपरासी या मामूली साइड रोल ही मिलते थे, लेकिन उनकी डायलॉग डिलीवरी और एक्सप्रेशंस इतने नैचुरल थे कि दर्शकों के दिलों में उनकी पहचान बनने लगी। 2004 में आई फिल्म “रन” में अभिषेक बच्चन के साथ उनका कव्वा बिरयानी वाला सीन न सिर्फ कॉमेडी का मास्टरक्लास था, बल्कि एक मीम-कल्चर आइकन भी बन गया। इस एक सीन ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई और वो इंडस्ट्री के भरोसेमंद कॉमेडियन माने जाने लगे।
“शेरनी” के सेट पर विवाद
नवंबर 2020 में, विजय राज का नाम अचानक सुर्खियों में आ गया—लेकिन इस बार कारण उनकी कोई फिल्म नहीं, बल्कि एक गंभीर आरोप था।वे मध्य प्रदेश के बालाघाट में विद्या बालन के साथ फिल्म “शेरनी” की शूटिंग कर रहे थे। तभी एक महिला क्रू मेम्बर ने उन पर छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। आरोप लगते ही पुलिस ने कार्रवाई की और 4 नवंबर 2020 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।यह खबर जंगल में आग की तरह फैली और फिल्म से जुड़े प्रोड्यूसर्स ने तुरंत उन्हें प्रोजेक्ट से हटा दिया। हालांकि, फिल्म की शूटिंग पहले ही लगभग पूरी हो चुकी थी।
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अदालत का फैसला और बरी होना
मामला कोर्ट तक पहुंचा। लंबी कानूनी करवाई के बाद, मई 2025 में अदालत ने सबूतों की कमी के कारण विजय राज को बरी कर दिया। हालांकि वे कानूनी रूप से निर्दोष साबित हो गए, लेकिन ए सच है कि इन सालों के दौरान उनका करियर ठहर-सा गया। मनोरंजन जगत में एक बार इमेज खराब हो जाए, तो उसका असर लंबे समय तक रहता है। बरी होने के बाद भी, दर्शकों और इंडस्ट्री के लोगों के मन में संदेह का साया बना रहता है।
पहले भी रहे विवाद में
ये पहली बार नहीं था जब विजय राज विवादों में फंसे हों। 2005 में, दुबई के अबू धाबी एयरपोर्ट पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उनके बैग से 6 ग्राम गांजा बरामद होने का आरोप लगा था। ये घटना भी उस समय मीडिया की सुर्खियों में रही और उनके प्रोफेशनल इमेज पर सवाल उठे।
करियर पर असर
अगर इन विवादों को अलग रख दें, तो विजय राज के पास ऐसा टैलेंट था जो उन्हें भारत के सबसे बड़े कॉमेडी एक्टर्स में ला सकता था। उनकी डायलॉग डिलेवरी, बॉडी लैंग्वेज और कैरेक्टर में ढल जाने की क्षमता उन्हें आम कॉमेडियन्स से अलग बनाती थी। लेकिन बॉलीवुड एक इमेज-ड्रिवन इंडस्ट्री है—जहां दर्शक और मेकर्स दोनों कलाकार की पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को अलग-अलग करके नहीं देखते। इसलिए, चाहे आप अदालत में निर्दोष साबित हो जाएं, लेकिन बदनामी का दाग अक्सर करियर के सुनहरे मौके छीन लेता है।
समाज और मीडिया की भूमिका
इस पूरी कहानी में समाज और मीडिया का किरदार भी अहम है। आज के दौर में सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनल्स किसी भी घटना को तुरंत वायरल कर देते हैं। आरोप लगते ही लोग बिना सच्चाई जाने लोग अपना मन बना लेते हैं।विजय राज का केस इसका उदाहरण है—2020 में गिरफ्तारी की खबर ने उन्हें ‘गुनहगार’ की तरह पेश किया, जबकि अदालत का फैसला आने में पांच साल लग गए।ऐसे में सवाल उठता है: क्या हमें सिर्फ आरोपों के आधार पर किसी का करियर और इमेज खत्म कर देनी चाहिए? या फिर अदालत की कारवाई पूरी होने तक इंतज़ार करना चाहिए?
नाम कमाने में उम्र, बदनाम होने में पल
विजय राज की कहानी उस कहावत को सच साबित करती है—
“नाम और इज्ज़त कमाने में पूरी ज़िंदगी लग जाती है, लेकिन बदनाम होने में सिर्फ एक लम्हा काफी है।
“सच तो ये है कि बदनामी का असर सिर्फ कलाकार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनके परिवार, दोस्तों और आने वाली पीढ़ियों तक महसूस किया जाता है। चाहे आरोप साबित हो या ना हो, एक बार समाज के मन में बना नेगेटिव ईमेज बदलना बेहद मुश्किल हो जाता है।
आगे का रास्ता
अब जब अदालत ने उन्हें बरी कर दिया है, सवाल ये है कि क्या बॉलीवुड उन्हें दोबारा वही मौके देगा जो पहले मिलते थे? क्या दर्शक उन्हें फिर से उसी मासूम कॉमिक अंदाज में अपनाएंगे?इतिहास बताता है कि बॉलीवुड ने कई बार विवादों में फंसे सितारों को वापसी का मौका दिया है, लेकिन इसके लिए मजबूत पब्लिक रिलेशन और लगातार अच्छा काम करना जरूरी होता है। विजय राज अगर आने वाले प्रोजेक्ट्स में फिर से अपनी कॉमेडी का जादू दिखा पाए, तो शायद लोग पुराने विवाद भूल जाएं।
नतीजा
लेकिन एक बात तो तय है
विजय राज का सफर एक चेतावनी भी है और एक सबक भी—चेतावनी इस बात की कि शोहरत के साथ हमेशा विवाद और निगाहें जुड़ी रहती हैं, और सबक इस बात का कि इंसान चाहे कितना भी टैलेंटेड हो, उसकी पर्सनल इमेज ही उसके करियर का सबसे मजबूत या सबसे कमजोर कड़ी बन सकती है।वो कहते हैं न—”एक अच्छा नाम कमाने में सालों लग जाते हैं, लेकिन उसे खोने में सिर्फ एक खबर काफी होती हइंसान की गलतियाँ उसकी पूरी कहानी नहीं होतीं। शायद एक दिन विजय राज फिर से वही मुस्कान लेकर सामने आएँ, जिसने कभी “कव्वा बिरयानी” को इतना यादगार बना दिया था।




