"समुंदर किनारे पिता-पुत्री और निर्देशक की सोच"

संदीप रेड्डी वांगा: जिसने 36 एकड़ ज़मीन बेचकर लिखी सफलता की कहानी

सिनेमा की दुनिया में एक फिल्म मेकर को पहचान बनाने के लिए कितनी मुश्किलों से गुज़रना पड़ता है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं संदीप रेड्डी वांगा। आज आप इन्हें कबीर सिंह और एनिमल जैसी सुपरहिट फिल्मों के डायरेक्टर के तौर पर जानते होंगे। लेकिन इनके पीछे एक ऐसी कहानी छिपी है, जो संघर्ष, हिम्मत और जुनून की मिसाल है।

शुरुआती सफर और फिल्ममेकिंग का सपना

संदीप रेड्डी वांगा का जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ था। पढ़ाई-लिखाई पूरी करने के बाद इन्हें फिल्मों का शौक चढ़ा। 2010 में इन्होंने फिल्ममेकिंग सीखी और अपने सपनों को पूरा करने की ठान ली। लेकिन फिल्म की दुनिया इतनी आसान नहीं होती। एक नई सोच, एक नया आइडिया और बिना किसी बड़े नाम या पहचान के फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाना किसी पहाड़ चढ़ने से कम नहीं था।

संदीप रेड्डी वांगा का पोर्ट्रेटIllustration created for editorial use | Bollywood Novel

सात साल की नाकामयाबी

फिल्ममेकिंग की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद संदीप अपनी स्क्रिप्ट लेकर प्रोड्यूसर्स के पास जाते रहे। सात साल तक लगातार कोशिश करते रहे, लेकिन हर बार इन्हें निराशा ही हाथ लगी। कोई कहता कि स्क्रिप्ट अच्छी नहीं है, तो कोई कहता कि मार्केट में इस तरह की फिल्म नहीं चलेगी। कई बार लोग हां भी करते, लेकिन आखिरी मौके पर पीछे हट जाते।

परिवार का बड़ा फैसला – 36 एकड़ ज़मीन बेचना

जब संदीप ने अर्जुन रेड्डी की स्क्रिप्ट प्रोड्यूसर्स को दिखाई, तो किसी ने भी इस प्रोजेक्ट पर भरोसा नहीं किया। आखिरकार उन्होंने सोचा कि अगर कोई उनके सपने पर भरोसा नहीं करता, तो क्यों न खुद ही इसे पूरा किया जाए।

लेकिन सवाल था पैसे का। फिल्म बनाने के लिए करोड़ों रुपए चाहिए थे। यहीं पर उनके परिवार ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी।

संदीप रेड्डी वांगा लोगों से बात करते हुएIllustration created for editorial use | Bollywood Novel

अर्जुन रेड्डी की सफलता

फिल्म बनकर तैयार हुई और 2017 में रिलीज हुई। किसी ने नहीं सोचा था कि यह फिल्म इतनी बड़ी हिट साबित होगी। महज़ 5 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 50 करोड़ रुपए की कमाई की। यानी अपने बजट से दस गुना ज्यादा।

यह फिल्म युवाओं को बेहद पसंद आई। इसकी कहानी, इसके बोल्ड सीन और इसके मुख्य किरदार का गुस्सैल लेकिन भावुक अंदाज़ दर्शकों के दिलों को छू गया।

कबीर सिंह और पैन इंडिया पहचान

अर्जुन रेड्डी की सफलता इतनी बड़ी थी कि इसका हिंदी रीमेक बनाने का फैसला हुआ। रीमेक बना – कबीर सिंह। शाहिद कपूर और कियारा आडवाणी स्टारर यह फिल्म 2019 में रिलीज हुई और इसने पूरे भारत में तहलका मचा दिया।

कबीर सिंह ने बॉक्स ऑफिस पर 400 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की। यह फिल्म शाहिद कपूर के करियर की सबसे बड़ी हिट साबित हुई। और इसके साथ ही संदीप रेड्डी वांगा ने खुद को उन चुनिंदा डायरेक्टर्स की लिस्ट में शामिल कर लिया, जिनकी फिल्में रिकॉर्ड तोड़ कमाई करती हैं।

एनिमल और नया मुकाम

कबीर सिंह की सफलता के बाद संदीप वांगा ने एनिमल बनाई, जिसमें रणबीर कपूर लीड रोल में थे। 2023 में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुनामी की तरह छा गई। एनिमल ने दुनिया भर में करीब 920 करोड़ रुपए कमाए।

इस फिल्म ने साबित कर दिया कि संदीप रेड्डी वांगा सिर्फ एक हिट फिल्म बनाने वाले डायरेक्टर नहीं हैं, बल्कि वह लगातार सुपरहिट देने की क्षमता रखते हैं।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

अगर उस समय उनके परिवार ने जमीन बेचने से मना कर दिया होता, तो शायद संदीप वांगा का सपना अधूरा रह जाता। लेकिन एक परिवार के भरोसे और एक फिल्ममेकर की जिद ने इतिहास बदल दिया।

आज संदीप वांगा फिल्म इंडस्ट्री में बड़े नामों में गिने जाते हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि अगर आप अपने सपने पर अटल रहते हैं, तो हालात चाहे जैसे भी हों, मंजिल एक दिन जरूर मिलती है।

संदीप रेड्डी वांगा दर्शक के सामनेIllustration created for editorial use | Bollywood Novel

आखिरी बात 

संदीप रेड्डी वांगा का सफर यह बताता है कि सफलता किसी को आसानी से नहीं मिलती। सात साल की असफलता, परिवार का त्याग और एक जुनूनी फैसला – इन सबने मिलकर उन्हें वह डायरेक्टर बनाया, जिसे आज पूरा भारत जानता है।

अगर अर्जुन रेड्डी नहीं बनती, तो शायद न कबीर सिंह बनती और न ही एनिमल जैसी फिल्म। कभी-कभी एक छोटा-सा फैसला जिंदगी बदल देता है।

तो आपको क्या लगता है? अगर संदीप के परिवार ने उस दिन जमीन बेचने से इंकार कर दिया होता, तो क्या आज हमें कबीर सिंह और एनिमल जैसी फिल्में देखने को मिलतीं?
अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।

Bollywood Novel के लेखक हसन बाबू का सिनेमैटिक तस्वीर
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