Cinema History

Cinema History कैटेगरी में भारतीय सिनेमा के उस सफर को समझाया जाता है, जहाँ फिल्मों की शुरुआत से लेकर आज के मॉडर्न दौर तक के बदलावों को गहराई से पेश किया जाता है। यहाँ बॉलीवुड और साउथ सिनेमा दोनों की कहानी, उनके पीछे की सोच, दौर के हिसाब से बदलती फिल्ममेकिंग और इंडस्ट्री के अहम पड़ाव को आसान और दिलचस्प अंदाज़ में बयान किया जाता है।

इस सेक्शन में आपको क्लासिक फिल्मों का असर, पुराने दौर के सुपरस्टार्स की विरासत, और सिनेमा के उन लम्हों की झलक मिलेगी जिन्होंने पूरी इंडस्ट्री का रुख बदल दिया।

सिनेमा हाल में बैठी भीड़, परदे पर बंदूक लिए किरदार, आसपास फ़िल्म रील, कैमरा और 70–80 के दशक का सिनेमाई माहौल

70s–80s में दर्शक क्या चाहता था? — सिनेमा, सुकून और उस दौर की सोच

70s–80s में दर्शक क्या चाहता था? यह सवाल सिर्फ़ सिनेमा का नहीं, बल्कि उस दौर के सुकून, भरोसे और ज़िंदगी की थकान से राहत का बयान है। यह लेख उसी सोच को समझने की एक ईमानदार कोशिश है। 📑 फ़हरिस्त भूमिका: जब सिनेमा राहत हुआ करता था 70s–80s का सामाजिक माहौल दर्शक की उम्मीदें और […]

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80s के दौर की सिनेमा रौशनी में खड़ा एक प्रतीकात्मक फ़िल्मी दृश्य, गहरे साये और गंभीर माहौल के साथ

Billa vs Don: कैसे 80s में रजनीकांत अपने करियर के शिखर पर पहुँचे

Billa और Don सिर्फ़ दो फ़िल्में नहीं थीं, बल्कि 80s के सिनेमा की दो अलग रूहें थीं। यह लेख उस दौर को टटोलता है, जब रजनीकांत का स्टारडम अपने शिखर पर पहुँचा और रीमेक ने नकल नहीं, बल्कि नई पहचान गढ़ी। 📑 फ़हरिस्त 🎬 जब मुकाबला नहीं, मिज़ाज बदला 🔥 Don और ग़ुस्से का दौर

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80 के दशक में रीमेक सिनेमा का इशारों में कहानी बयान करता दृश्य

80s में रीमेक क्यों ज़रूरी थे: जब मजबूरी ने रणनीति का रूप लिया

80 का दशक भारतीय सिनेमा के लिए आसान नहीं था। हालात बदल रहे थे, दर्शक सोच रहा था, और इंडस्ट्री अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही थी। ऐसे में रीमेक नकल नहीं, बल्कि ज़रूरत बन गए। यही वजह है कि 80s me remake kyu zaroori the — यह सवाल सिर्फ़ फिल्मों का नहीं, उस दौर

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1980 के दशक में उभरता साउथ सिनेमा का प्रतीकात्मक दृश्य

South Cinema Rise in 80s: जब साउथ सिनेमा ने भारतीय फिल्मों की दिशा बदल दी

80 का दशक साउथ सिनेमा के लिए सिर्फ़ हिट फिल्मों का दौर नहीं था, बल्कि पहचान, आत्मविश्वास और अपनी ज़मीन तलाशने का वक़्त था। इसी दौर में वह बदलाव शुरू हुआ जिसे आज south cinema rise in 80s कहा जाता है। 📑 फ़हरिस्त 🔥 भूमिका: जब सिनेमा की हवा दक्षिण से चलने लगी 🕰️ 70

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1970 के दशक के गुस्सैल नायक की प्रतीकात्मक छवि

अमिताभ बच्चन का Angry Young Man फ़ॉर्मूला क्या था? जिसने भारतीय सिनेमा की सोच बदल दी

70 और 80 के दशक में भारतीय सिनेमा सिर्फ़ मनोरंजन नहीं था, वो आम आदमी के ग़ुस्से, सवालों और टूटे भरोसे की आवाज़ था। इसी दौर में जन्म हुआ Angry Young Man का — एक ऐसा फ़ॉर्मूला जिसने अमिताभ बच्चन को आइकॉन बना दिया और पूरे सिनेमा की दिशा बदल दी। 📑 फ़हरिस्त 🔥 भूमिका:

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सिनेमैटिक अंदाज़ में सुपरस्टार रजनीकांत का पोर्ट्रेट

एक दौर जब रजनीकांत करियर अमिताभ बच्चन रीमेक से बचा

Editor’s Note: यह लेख उपलब्ध फिल्मी इतिहास, पुराने इंटरव्यूज़ और सिनेमा विश्लेषकों की राय पर आधारित है। यहाँ “रीमेक” शब्द का प्रयोग inspiration और adaptation के संदर्भ में किया गया है, न कि किसी कलाकार या इंडस्ट्री को कमतर दिखाने के उद्देश्य से। Excerpt: आज जब बॉलीवुड पर साउथ फिल्मों की नकल का आरोप लगता

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