ग्रीन स्क्रीन सेट पर VFX आर्टिस्ट काम करते हुए

Bollywood में VFX Planning की सबसे बड़ी ग़लतियाँ: जब बिना नक़्शे के जंग लड़ी जाती है

Bollywood में VFX Planning की सबसे बड़ी ग़लतियाँ सिर्फ़ technical नहीं, बल्कि सोच की नाकामी हैं। जब बिना नक़्शे के जंग लड़ी जाती है, तब पर्दे का जादू किसी न किसी की मेहनत कुचल कर ही खड़ा होता है।

Bollywood में VFX की बात आते ही अक्सर उँगलियाँ software, budget या artists की क़ाबिलियत पर उठती हैं। कोई कहता है यहाँ talent नहीं है, कोई बोलता है पैसा कम पड़ जाता है, तो कोई सीधे फ़ैसला सुना देता है कि “Hollywood जैसा VFX India में possible ही नहीं।”

मगर हक़ीक़त इससे कहीं ज़्यादा तल्ख़ है। Bollywood में VFX Planning की सबसे बड़ी ग़लतियाँ वहाँ शुरू होती हैं, जहाँ फिल्म की बुनियाद रखी जाती है — script, schedule और सोच के स्तर पर। यहाँ VFX को एक process नहीं, बल्कि emergency service समझ लिया गया है। जब shoot में कुछ बिगड़ जाए, तो आराम से कहा जाता है: “Post mein VFX se fix kar lenge.”

यहीं से फिल्म का सफ़र एक ऐसी ढलान पर उतर जाता है, जहाँ से न quality बचती है, न budget और न ही वो इंसान जो पर्दे के पीछे बैठकर जादू रचने की कोशिश करता है।

📑 फ़हरिस्त

अव्यवस्थित बॉलीवुड फिल्म सेट पर बहस करता डायरेक्टर और उलझी हुई क्रू

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🎥 Planning नहीं, जुगाड़ से फिल्म बनाना

Bollywood की सबसे पुरानी और सबसे ख़तरनाक आदत है — जुगाड़ को planning समझ लेना। यहाँ planning को एक boring, time-consuming और non-essential चीज़ माना जाता है।

Star की dates, release window और producer का confidence — यही असली planning बन जाती है।

Hollywood में VFX planning फिल्म की रूह होती है। वहीं Bollywood में VFX planning अक्सर आख़िरी मीटिंग का मुद्दा बनती है। जब shoot almost तय हो चुका होता है, तभी किसी को याद आता है कि “इस कहानी में तो VFX भी है।”

यहीं से Bollywood में VFX Planning की सबसे बड़ी ग़लतियाँ एक-एक करके सामने आने लगती हैं। क्योंकि जब नींव ही जुगाड़ पर रखी जाए, तो ऊपर खड़ा होने वाला महल ज़्यादा देर टिकता नहीं।

अधूरे फिल्म सेट में खड़ा उलझा हुआ बॉलीवुड अभिनेता

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✍️ Script Lock के बिना VFX शुरू कर देना

VFX planning की पहली और सबसे बुनियादी शर्त होती है — script lock। यानी कहानी पूरी तरह तय, scenes finalized और बदलावों पर ताला। मगर Bollywood में script lock को एक आदर्श समझा जाता है, ज़रूरत नहीं।

यहाँ scripts shoot के दौरान बदलती हैं, edit table पर rewrite होती हैं और कभी-कभी actor के mood के हिसाब से twist ले लेती हैं। ऐसे माहौल में VFX shots को plan करना ऐसा है जैसे चलती ट्रेन पर नक़्शा बनाना।

नतीजा साफ़ होता है — एक ही shot बार-बार बदलता है, completed VFX discard होता है और artists वही काम तीन-चार बार दोहराते हैं। फिर जब budget control से बाहर जाता है, तो उँगली VFX पर उठती है, planning पर नहीं।

Bollywood में शायद ही कोई project ऐसा होता है जहाँ script सच में lock हो। हर नई suggestion “minor change” कहलाती है, मगर VFX pipeline के लिए ये minor नहीं होती। एक छोटा सा narrative tweak dozens of shots को प्रभावित कर देता है।

Script lock के बिना VFX शुरू करना दरअसल ये मान लेना है कि नुकसान बाद में भी संभाल लेंगे। मगर नुकसान सिर्फ़ पैसे का नहीं होता — वो confidence, workflow और artists की sanity का भी होता है।

यहीं से Bollywood में VFX Planning की सबसे बड़ी ग़लतियाँ silently multiply करने लगती हैं।

रात भर काम करते थके हुए VFX कलाकार

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🧠 Pre-Visualization को Time Waste समझना

Pre-Visualization यानी previs, फिल्म बनाने की उस stage का नाम है जहाँ शूटिंग से पहले ही पूरी फिल्म को दिमाग़ में नहीं, स्क्रीन पर देखा जाता है। Camera angle क्या होगा, shot कितना लंबा रहेगा, background real होगा या digital — ये सब previs में तय होता है।

Hollywood में previs को luxury नहीं, ज़रूरत माना जाता है। वहीं Bollywood में previs को अक्सर एक extra expense समझ लिया जाता है। Producer का सवाल होता है: “इतना सब पहले क्यों? Shoot pe dekh lenge.”

यहीं से Bollywood में VFX Planning की सबसे बड़ी ग़लतियाँ और गहरी हो जाती हैं। Previs न होने का मतलब है set पर confusion, camera placement में गड़बड़ी और green screen framing में भारी चूक।

Actor को नहीं पता वो किस दुनिया में खड़ा है, director को साफ़ vision नहीं और camera operator अंदाज़े से shots ले रहा है। बाद में जब footage VFX house तक पहुँचती है, तो team को miracle करने को कहा जाता है।

Previs time बचाने के लिए नहीं, time बरबाद होने से बचाने के लिए होता है। मगर Bollywood ये बात आज भी मानने को तैयार नहीं।

Previs का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये imagination को limitation से पहले test कर लेता है। जो shot previs में impossible लगता है, वो shoot floor पर disaster बनने से पहले ही बचाया जा सकता है।

लेकिन जब previs को skip किया जाता है, तो VFX team को बाद में वो problems solve करनी पड़ती हैं जिनका जन्म planning stage में ही हो चुका होता है।

⏰ Unrealistic Schedules और Planning की कमी

Bollywood में schedule planning अक्सर इंसानों के हिसाब से नहीं, calendar के हिसाब से होती है। Festival release, holiday weekend और star की availability — यही तीन pillars हैं जिन पर पूरा shooting schedule खड़ा किया जाता है।

VFX की complexity, shot count और technical difficulty पर शायद ही कोई गंभीर चर्चा होती है। Producer को लगता है कि VFX computer का काम है, इंसान का नहीं। इसलिए timelines काग़ज़ पर बहुत सुंदर दिखती हैं, मगर ground reality से उनका कोई रिश्ता नहीं।

50 heavy VFX shots हों या 150 — जवाब वही होता है: “15–20 din ka kaam hai।” यहीं से deadlines impossible बन जाती हैं और artists के लिए काम नहीं, सज़ा शुरू हो जाती है।

जब schedule realistic नहीं होता, तो quality सबसे पहले मरती है। उसके बाद mental health, फिर passion। और आख़िर में industry को वही complaint रहती है: “Achhe VFX artists milte hi nahi.”

सच ये है कि talent भागता नहीं, उसे भगाया जाता है — planning की बेरहमी से।

🤝 Director–VFX Supervisor Disconnect

Bollywood में एक और बड़ी planning गलती है — VFX supervisor को बहुत देर से involve करना। कई फिल्मों में तो supervisor को shooting खत्म होने के बाद बुलाया जाता है, जब damage हो चुका होता है।

Director का vision अलग होता है, मगर उसे technical limitation का अंदाज़ा नहीं। VFX supervisor के पास solution होता है, मगर उसे set पर बोलने का मौका नहीं मिलता। दोनों के बीच ये gap ही आगे चलकर chaos बन जाता है।

Set पर अगर VFX supervisor मौजूद न हो, तो lighting mismatch, camera data miss और plates unusable होने की पूरी संभावना रहती है। फिर वही पुराना जुमला सामने आता है: “Post mein fix kar lenge.”

मगर post कोई जादू की छड़ी नहीं है। जो planning में miss हुआ, वो post में सिर्फ़ महँगा और painful बन जाता है।

Bollywood में VFX Planning की सबसे बड़ी ग़लतियाँ यहीं से human cost में बदलती हैं — जहाँ mistake किसी file की नहीं, किसी इंसान की ज़िंदगी की होती है।

अधूरे फैसलों के बीच परेशान VFX आर्टिस्ट

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🔄 Last-Minute Changes: VFX की सबसे ख़ामोश कब्र

अगर Bollywood में VFX planning की कोई एक ऐसी बीमारी है जो हर project को अंदर से खोखला कर देती है, तो वो है last-minute changes। ये बदलाव अचानक नहीं आते, ये planning की कमी से पैदा होते हैं

कभी climax बदल जाता है, कभी background “थोड़ा और grand” चाहिए होता है, कभी creature design रातों-रात बदल दी जाती है। ये सारे फैसले ideally planning phase में lock होने चाहिए, मगर Bollywood में ये delivery के बिल्कुल क़रीब लिए जाते हैं।

Director को लगता है बदलाव creative है, producer सोचता है पैसा justify हो जाएगा, मगर VFX artist के लिए ये बदलाव सीधा workload explosion होता है। जो shot complete हो चुका था, वो discard हो जाता है और वही काम दोबारा शुरू होता है।

यहीं से Bollywood में VFX Planning की सबसे बड़ी ग़लतियाँ VFX houses को financial और mental दोनों तरह से तोड़ने लगती हैं। Deadline वही रहती है, मगर काम दोगुना हो जाता है।

Last-minute changes creativity नहीं, chaos पैदा करते हैं। और chaos में कभी quality नहीं बचती।

💸 Technical Breakdown के बिना Budget तय करना

Bollywood में VFX budget अक्सर किसी technical analysis पर नहीं, बल्कि comparison और अंदाज़े पर तय होता है। सवाल ये नहीं होता कि shot कितना complex है, सवाल ये होता है कि “पिछली फिल्म में कितना खर्च आया था?”

Hollywood में budget तय करने से पहले shot breakdown होता है — simulations, crowd replication, environment build, render hours और manpower सब calculate किए जाते हैं। Bollywood में ये process या तो अधूरा होता है या होता ही नहीं।

जब budget बिना planning के तय होता है, तो project के बीच में पैसे की कमी सामने आती है। फिर shortcuts ढूँढे जाते हैं — quality compromise, artist overload और unrealistic timelines।

Producer को लगता है VFX companies overcharge कर रही हैं, VFX companies सोचती हैं producer समझना ही नहीं चाहता। इस blame game के बीच सबसे ज़्यादा पिसता है artist।

सच ये है कि problem budget नहीं, budget से पहले planning की गैरमौजूदगी है।

🧩 “Post mein sab theek ho jayega” वाली सोच

Bollywood VFX ecosystem का सबसे बड़ा illusion यही है — “Post mein sab theek ho jayega।” ये एक वाक्य इतना आम है कि जैसे industry का unofficial slogan बन चुका हो।

इस सोच के चलते set पर mistakes ignore कर दी जाती हैं। Lighting perfect नहीं? चलने दो। Camera data miss हो गया? कोई बात नहीं। Background clean नहीं? VFX kar lega।

Post में fix करना मुमकिन है, मगर उसकी cost planning stage से कई गुना ज़्यादा होती है। जो काम set पर एक घंटे में सुधर सकता था, वो post में कई दिन ले लेता है।

इस illusion की वजह से budget explode होता है, deadlines shrink होती हैं और artists burnout की तरफ़ धकेल दिए जाते हैं। फिर industry हैरान होती है कि अच्छे VFX artists India छोड़कर क्यों जा रहे हैं।

Bollywood में VFX Planning की सबसे बड़ी ग़लतियाँ यहीं पूरी तरह expose हो जाती हैं — जब problem को problem मानने से ही इंकार कर दिया जाता है।

योजनाबद्ध मीटिंग और अव्यवस्थित फिल्म सेट का तीखा फर्क

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🌍 Hollywood Model से Bollywood क्या सीख सकता है?

Hollywood को ideal मानना ज़रूरी नहीं, मगर planning के मामले में उससे आँख चुराना भी बेईमानी होगी। वहाँ VFX को आख़िरी option नहीं, बल्कि storytelling का हिस्सा माना जाता है।

Hollywood फिल्मों में VFX supervisor script stage से ही involve होता है। Shot किस angle से होगा, कौन सा practical होगा और कौन सा digital — ये फैसले shoot से पहले lock हो जाते हैं।

Pre-Visualization वहाँ optional नहीं, mandatory stage है। Director set पर confused नहीं होता, actor को पता होता है वो किस दुनिया में खड़ा है और camera team साफ़ vision के साथ काम करती है।

Bollywood अगर overnight Hollywood बनने की कोशिश करे, तो नाकाम होगी। मगर अगर वो planning को इज़्ज़त देना सीख ले, तो self-destruction ज़रूर रुक सकता है।

Hollywood model ये नहीं कहता कि ज़्यादा पैसा लगाओ। वो बस इतना कहता है — पहले सोचो, फिर shoot करो।

🧠 Planning Failures कैसे बाकी सारी समस्याओं को जन्म देती हैं?

Bollywood VFX ecosystem में जो भी बड़ी समस्याएँ दिखती हैं — low bidding, impossible deadlines, talent drain — ये सब अलग-अलग issues नहीं हैं। ये एक ही जड़ से निकली शाखाएँ हैं।

जब planning कमज़ोर होती है, तो bidding blind होती है। Blind bidding से budgets unrealistic बनते हैं। Unrealistic budgets से deadlines shrink होती हैं। और shrink हुई deadlines artists को burnout की तरफ़ धकेल देती हैं।

इस domino effect में सबसे आख़िर में गिरता है quality का मोहरा। मगर blame सबसे पहले उसी पर आता है। Industry को लगता है कि audience को VFX पसंद नहीं आया, जबकि audience को खराब planning का नतीजा दिखा।

Bollywood में VFX Planning की सबसे बड़ी ग़लतियाँ इसलिए dangerous हैं क्योंकि ये quietly काम करती हैं। ये कोई headline नहीं बनतीं, कोई award speech में mention नहीं होतीं — बस projects को अंदर से खोखला करती रहती हैं।

जब तक industry planning failures को root cause की तरह नहीं देखेगी, तब तक हर नई फिल्म वही पुरानी ग़लतियाँ दोहराती रहेगी।

🔍 Planning को Expense नहीं, Investment क्यों समझना ज़रूरी है?

Bollywood में planning को अक्सर cost center की तरह treat किया जाता है। सवाल ये नहीं होता कि planning से कितना बचा, सवाल ये होता है कि planning पर कितना खर्च हो गया।

मगर हक़ीक़त उलट है। सही planning budget बचाती है, time बचाती है और सबसे अहम — इंसानों को बचाती है। Previs, script lock और realistic scheduling कोई luxury नहीं, ये safety net हैं।

जिस दिन planning को ego नहीं, process माना जाएगा, उसी दिन VFX artists को भी professional समझा जाएगा, disposable नहीं।

Industry को ये समझना होगा कि planning में लगाया गया हर एक घंटा, post में कई दिन बचाता है।

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❓ FAQs: Bollywood VFX Planning से जुड़े अहम सवाल

🎬 Bollywood में VFX Planning इतनी कमज़ोर क्यों होती है?

क्योंकि planning को यहाँ process नहीं, expense समझा जाता है। Script lock, previs और technical breakdown को time waste माना जाता है, जबकि वही चीज़ें आगे चलकर time और पैसा दोनों बचाती हैं।

🧠 Pre-Visualization Bollywood में क्यों avoid की जाती है?

Previs को अक्सर extra cost और delay के तौर पर देखा जाता है। Industry को लगता है कि set पर जाकर सब clear हो जाएगा, जबकि हक़ीक़त में previs confusion कम करती है और shoot को direction देती है।

⏰ Unrealistic deadlines का सबसे बड़ा नुकसान किसे होता है?

सबसे बड़ा नुकसान VFX artists को होता है। Impossible timelines burnout, mental pressure और quality compromise को जन्म देती हैं। आखिरकार talent industry छोड़ने पर मजबूर हो जाता है।

🔄 Last-minute changes क्यों VFX के लिए खतरनाक हैं?

क्योंकि ये changes planning phase में नहीं, delivery के क़रीब आते हैं। इससे completed work discard होता है, workload अचानक बढ़ता है और deadlines वही की वही रहती हैं।

💸 क्या Bollywood में VFX budget वाक़ई कम होता है?

Problem budget का कम होना नहीं, budget तय करने से पहले technical planning का न होना है। जब breakdown के बिना budget तय होगा, तो या तो quality गिरेगी या artists टूटेंगे।

🌍 Hollywood model से Bollywood क्या realistically सीख सकता है?

Discipline। Script lock, previs, early involvement of VFX supervisors और realistic scheduling। Hollywood perfect नहीं है, मगर planning को गंभीरता से लेता है — Bollywood को बस यही सीखने की ज़रूरत है।

📌 आख़िरी बात

Bollywood में VFX की नाकामी कोई software की कमी नहीं है, न ही talent की। ये एक सोच की नाकामी है — जहाँ planning को बोझ और artists को disposable समझ लिया गया है।

जब बिना नक़्शे के जंग लड़ी जाती है, तो हार तय होती है। पर्दे पर जो जादू दिखता है, उसके पीछे अगर planning टूटी हुई हो, तो वो जादू किसी न किसी की ज़िंदगी तोड़कर ही खड़ा होता है।

Bollywood में VFX Planning की सबसे बड़ी ग़लतियाँ सुधारी जा सकती हैं। Talent मौजूद है, tools मौजूद हैं, audience भी ready है। कमी सिर्फ़ इतनी है कि planning को इज़्ज़त नहीं दी जाती।

जिस दिन planning को delay नहीं, investment समझा जाएगा — उसी दिन VFX artists को भी मज़दूर नहीं, professional माना जाएगा।

और शायद उसी दिन Bollywood का VFX सच में मज़बूत होगा — बिना किसी की मेहनत तोड़े।

Bollywood Novel
जहाँ सिनेमा सिर्फ़ दिखाया नहीं जाता, बल्कि उसके पीछे की हक़ीक़त भी बेनक़ाब की जाती है।

Bollywood Novel के लेखक हसन बाबू का सिनेमैटिक तस्वीर
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