- मुख़्तसर (Summary): फिल्म ‘नमक हलाल’ का सदाबहार नगमा ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी’ सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि मौसिकी की तारीख का एक मील का पत्थर है। जानिए कैसे किशोर दा की नाराजगी और बप्पी दा की जिद ने मिलकर इस मास्टरपीस को जन्म दिया।
📜 सामग्री सूची (Table of Contents)
बॉलीवुड की तारीख (इतिहास) में कुछ गाने ऐसे होते हैं जो वक्त की धूल में नहीं खोते, बल्कि एक ‘लेजेंड’ बन जाते हैं। साल 1982 में आई फिल्म ‘नमक हलाल’ का वो सदाबहार नगमा ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी’ भी कुछ ऐसा ही है। अमिताभ बच्चन का वो अनोखा अंदाज और किशोर कुमार की जादुई आवाज, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शुरुआत में किशोर दा इस गाने को गाने के हक में बिल्कुल नहीं थे? उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि “यह गाना है या कोई लंबी दास्तान?”
Illustration created for editorial use | Bollywood Novel
🎤 जब किशोर दा ने पूछा- क्या मुझे तानसेन समझते हो?
संगीत की महफिलों में यह किस्सा आज भी बड़े चाव से सुनाया जाता है। जब बप्पी लहरी ने पहली दफा इस गाने की धुन किशोर दा को सुनाई, तो उनका रिएक्शन किसी बम की तरह फटा। किशोर दा अपनी बेबाकी के लिए मशहूर थे। गाने की लंबाई और उसके मुश्किल क्लासिकल अंतरे देख उन्होंने गुस्से और हैरानी में बप्पी दा से कहा, “बप्पी, क्या तुम मुझे तानसेन समझते हो? यह गाना है या कोई लंबी कहानी? मैं इसे नहीं गाऊंगा। तुम लोग इतने बड़े-बड़े गाने ले आते हो!”
🤝 मामा-भांजे का रिश्ता और संगीत का तड़का
बहुत कम लोग जानते हैं कि मशहूर संगीतकार बप्पी लहरी, किशोर कुमार के सगे भांजे थे। बप्पी दा ने जब फिल्म ‘नमक हलाल’ के लिए इस गाने की धुन तैयार की, तो उनके जेहन में सिर्फ एक ही फनकार का चेहरा था—उनके मामा किशोर कुमार। किशोर दा की नाराजगी के बावजूद बप्पी दा हार मानने वालों में से नहीं थे। उन्हें पता था कि इस गाने में जो ‘नजाकत’ और ‘पागलपन’ चाहिए, वह सिर्फ किशोर कुमार ही दे सकते हैं।
🎼 ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी’ की मेकिंग का पेचीदा सफर
बप्पी दा के काफी कन्विंस करने और मिन्नतें करने के बाद आखिरकार मामा गाने के लिए राजी हुए। ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी’ कोई मामूली फिल्मी गाना नहीं था। यह करीब 12 मिनट लंबा एक ऐसा सफर था जिसमें हिंदुस्तानी मौसिकी का अनुशासन भी था और डिस्को का जदीद (आधुनिक) शोर भी। इसे रिकॉर्ड करना किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि इसमें कई उतार-चढ़ाव थे।
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🎹 डिस्को और क्लासिकल का पहला अनोखा संगम
कहा जाता है कि यह बॉलीवुड का वो पहला गाना था जिसमें डिस्को बीट्स और क्लासिकल सरगम का ‘फ्यूजन’ हुआ था। इस गाने में एक मुश्किल सरगम पोर्शन भी था—“सा सा गा गा रे रे नी नी सा सा”। किशोर दा ने तो इसे अपनी मखमली आवाज में पिरोया ही, साथ ही पंडित सत्यनारायण मिश्रा ने भी उस सरगम का एक छोटा सा हिस्सा गाया। इस मेल ने गाने को एक अलग ही ‘मकबूलियत’ (प्रसिद्धि) बख्श दी।
दिलचस्प बात: जब यह गाना रिलीज हुआ, तो इसने कामयाबी के तमाम रिकॉर्ड तोड़ दिए और अमिताभ बच्चन के करियर का सबसे आइकोनिक डांस नंबर बन गया।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी’ गाने के संगीतकार कौन थे?A. इस गाने के संगीतकार बप्पी लहरी थे और उन्होंने इसे अपने मामा किशोर कुमार से गवाया था।
Q2. किशोर कुमार ने इस गाने को गाने से मना क्यों किया था?A. गाने की अत्यधिक लंबाई और कठिन क्लासिकल सरगम को देखकर किशोर कुमार शुरू में थोड़े हिचकिचा रहे थे।
आख़िरी बात: किशोर कुमार और बप्पी लहरी की उस छोटी सी तकरार ने हमें संगीत का वो हीरा दिया, जिसकी चमक आज भी बरकरार है। अगर आज हम ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी’ को सुनकर झूम उठते हैं, तो इसका श्रेय बप्पी दा की जिद और किशोर दा की बेमिसाल गायकी को जाता है।




