भारतीय सिनेमा का इतिहास बहुत ही समृद्ध और रंगीन है। यहाँ कई सितारे आए, जिन्होंने पर्दे पर अपनी छवि से दर्शकों के दिलों पर राज किया। कुछ चेहरे ऐसे थे, जिन्हें देखते ही दर्शक प्यार और सम्मान से भर जाते थे, तो कुछ ऐसे भी थे जिनके आते ही पर्दे पर नफरत और खौफ का माहौल बन जाता था। इन्हीं चेहरों में से एक नाम था ललिता पवार का।ललिता पवार का असली नाम अंबा लक्ष्मण राव शगुन था। भारतीय फिल्मों की पहली फीमेल विलेन के तौर पर उन्हें जाना जाता है। साथ ही, परदे पर “क्रूर सास” और “चालाक सास-बहू” जैसे किरदार निभाकर उन्होंने जो पहचान बनाई, वह आज तक बेमिसाल है

साइलेंट फिल्मों से शुरू हुआ सफर

ललिता पवार ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत साइलेंट फिल्मों से की थी। उस दौर में वह एक खूबसूरत और मासूम चेहरा थीं, जो हीरोइन के रूप में नजर आती थीं। धीरे-धीरे उन्होंने कई फिल्मों में अभिनय किया और इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई। लेकिन उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ 1942 में आया।

ललिता पवार का युवा और मंथरा रूप का कलात्मक चित्रण
Illustration created for editorial use | Bollywood Novel

एक थप्पड़ जिसने बदल दी ज़िन्दगी

साल 1942 में आई फिल्म “जंगे आजादी” की शूटिंग के दौरान एक ऐसा हादसा हुआ जिसने ललिता पवार की पूरी ज़िंदगी और करियर को बदलकर रख दिया। इस फिल्म में एक सीन के दौरान उनके सह-कलाकार भगवान दादा को उन्हें थप्पड़ मारना था। लेकिन यह थप्पड़ इतना जोरदार पड़ा कि सिर्फ चोट ही नहीं लगी, बल्कि ललिता पवार को फेशियल पैरालाइसिस हो गया।

इस हादसे ने उनकी बाईं आंख की रोशनी छीन ली और चेहरे पर स्थायी असर डाल दिया। उस समय ललिता सिर्फ 26 साल की थीं। उनके लिए यह पल बेहद दर्दनाक था क्योंकि एक अभिनेत्री के रूप में उनकी खूबसूरती और चेहरा ही उनकी पहचान था।

गुस्से में ललिता पवार का फोटो
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वापसी और खलनायिका की पहचान

तीन साल तक फिल्मों से दूर रहने के बाद, ललिता पवार ने हिम्मत जुटाई और 1945 में दोबारा वापसी की। लेकिन इस बार उनका चेहरा बदल चुका था। अब उन्हें रोमांटिक हीरोइन के रोल नहीं मिल रहे थे। इसके बजाय, उन्हें सख्त, कठोर और नकारात्मक किरदार ऑफर होने लगे।

यही वो मोड़ था, जिसने उन्हें “फिल्म इंडस्ट्री की पहली फीमेल विलेन” बना दिया। ललिता पवार ने क्रूर सास, चालाक पड़ोसन और खतरनाक खलनायिका के किरदार इतने दमदार अंदाज़ में निभाए कि दर्शक असल जिंदगी में भी उन्हें नफरत की नज़रों से देखने लगे।

70 साल का करियर और 700+ फिल्में

ललिता पवार का फिल्मी करियर लगभग 70 साल लंबा रहा। इस दौरान उन्होंने 700 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और एक वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। हिंदी सिनेमा के साथ-साथ उन्होंने मराठी और अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी अभिनय किया।उन्होंने राज कपूर, दिलीप कुमार, अशोक कुमार से लेकर अमिताभ बच्चन तक कई पीढ़ियों के बड़े सितारों के साथ काम किया। हर युग में उनके किरदारों का असर दर्शकों पर गहरा रहा।

ललिता पवार का घमंड और रुवाब वाला सिनेमाई फ़ोटो
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रामायण में मंथरा बनकर अमर हुईं

हालांकि उन्होंने सैकड़ों फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा पहचान मिली 1987 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुए धार्मिक धारावाहिक रामायण से। इस सीरियल में उन्होंने मंथरा का किरदार निभाया था — वही दासी जिसने कैकयी को भरमाकर राम को 14 साल का वनवास दिलवाया।

ललिता पवार ने इस किरदार को इतनी बखूबी निभाया कि लोगों के दिलों में मंथरा की छवि उनकी असल जिंदगी से भी जुड़ गई। आज भी जब “मंथरा” का नाम लिया जाता है, तो दर्शकों की आंखों के सामने ललिता पवार का चेहरा घूम जाता है।

लोगों की नफरत और बददुआ का दर्द

ललिता पवार के अभिनय की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने अपने नकारात्मक किरदारों को इतना असली बना दिया कि दर्शक उन्हें असल में बुरा मानने लगे। कई बार लोग उन्हें देखकर गालियाँ देने लगते, तो कई लोग उनसे दूरी बना लेते।

अपने आखिरी दिनों में जब वह कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रही थीं, तब उन्होंने कहा था कि यह सारी तकलीफें उस बददुआ का असर हैं जो लोगों ने मंथरा के किरदार के लिए दी थीं — “यह श्राप है, जो मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गया।”

मजबूत इरादों वाली अदाकारा

हालांकि जिंदगी ने उन्हें कई तकलीफें दीं, लेकिन ललिता पवार ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने अभिनय से साबित किया कि सफलता सिर्फ खूबसूरती या हीरोइन बनने में नहीं है, बल्कि किसी भी रोल को निभाने की गहराई और दमखम में है।

वह इस बात की जीती-जागती मिसाल हैं कि एक हादसा भी इंसान को खत्म नहीं करता, बल्कि उसे नए रास्ते और पहचान दे सकता है।

सीख

ललिता पवार भारतीय सिनेमा की वो अभिनेत्री थीं, जिन्होंने खलनायिका के किरदारों को नया जीवन दिया। अगर वह सिर्फ हीरोइन बनकर रह जातीं, तो शायद वो नाम और पहचान न बना पातीं जो उन्हें विलेन के रूप में मिली।

उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि जिंदगी में चाहे कितनी ही मुश्किलें आएं, अगर इंसान हिम्मत से सामना करे तो हर मुश्किल को अवसर में बदला जा सकता है। आज भी जब फिल्मों और टीवी धारावाहिकों में कोई क्रूर सास या चालाक महिला दिखाई जाती है, तो दर्शकों को ललिता पवार की याद ज़रूर आती है।

लेखक की राय: ललिता पवार सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि संघर्ष और जज़्बे की मिसाल थीं। उन्होंने साबित किया कि असली कलाकार वही है जो हर किरदार को दिल से जी ले और लोगों के दिलों पर हमेशा के लिए छा जाए।